जगदलपुर। कभी नक्सलवाद की पहचान बन चुका बस्तर अब शांति की राह पर लौट रहा है। शुक्रवार को बस्तर में इतिहास रच गया, जब 210 हथियारबंद नक्सलियों ने जगदलपुर में आयोजित कार्यक्रम में आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें 110 महिला नक्सली भी शामिल हैं। सभी ने हाथों में संविधान की कॉपी और गुलाब लेकर मुख्यधारा में ‘घर वापसी’ की।

गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की मौजूदगी में हुए इस ‘मेगा सरेंडर’ ने छत्तीसगढ़ के नक्सल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है। शाह ने कहा कि “जो आत्मसमर्पण करेंगे उनका स्वागत होगा, लेकिन जो हथियार उठाएंगे, उन्हें हमारी सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।”

बस्तर से मिट रहा लाल आतंक
इस सरेंडर के साथ उत्तर बस्तर और अबूझमाड़ को नक्सलियों के आतंक से मुक्त बताया गया है। अब केवल दक्षिण बस्तर के कुछ इलाकों में ही नक्सली सक्रिय हैं। अमित शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्ण अंत करना है।

भाजपा सरकार बनने के बाद अब तक 2100 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण, 1785 नक्सली गिरफ्तार और 477 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए हैं, जिनमें कई बड़े कैडर के सदस्य भी शामिल हैं।
सरकार पर बढ़ा भरोसा
सरेंडर करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास नीति के तहत लाभ दिए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में अब विकास कार्यों की रफ्तार तेज हो गई है—सड़कें, मोबाइल टॉवर, आवास और बाजारों की रौनक इस बदलाव की गवाही दे रहे हैं।
शांति की ओर बढ़ता बस्तर
अमित शाह हाल ही में बस्तर दशहरा में भी शामिल हुए थे। उन्होंने जनता से सीधे संवाद कर संदेश दिया कि अब बस्तर शांति, विकास और समृद्धि की राह पर है। लगातार सरेंडर के सिलसिले से यह साफ है कि अब नक्सलवाद अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है और बस्तर के ‘दाग’ मिट रहे हैं।

