रायपुर/मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने कहा कि भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है और प्रकृति संरक्षण हमारी परंपरा का हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और अब राज्य ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बना रहा है।
राजधानी Raipur स्थित Pandit Ravishankar Shukla University के ऑडिटोरियम में आयोजित दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मंच पर नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, शिक्षाविदों और पर्यावरण विशेषज्ञों का एक साथ आना बेहद महत्वपूर्ण है। जलवायु संकट के बढ़ते खतरे को देखते हुए अब केवल चर्चा नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के उपायों को व्यवहार में उतारने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार विरासत के साथ विकास की नीति पर काम कर रही है। पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली भारत की हजारों साल पुरानी परंपरा रही है और सरकार इसे मजबूत करने के लिए लगातार नीतिगत कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का बड़ा केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचारों को अपनाया जा रहा है। साथ ही सोलर रूफटॉप योजना के जरिए उपभोक्ताओं को ऊर्जा उत्पादक बनाने की दिशा में भी काम हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के माध्यम से लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश का लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है और जनजातीय समाज प्रकृति संरक्षण की परंपरा को पीढ़ियों से निभाता आ रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों के संकलन “एब्स्ट्रेक्ट”, “हाइलाइट्स ऑफ द समिट” और जनजातीय कहानियों पर आधारित पुस्तक “कथा कंथली” का विमोचन भी किया।

