रायपुर/छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के बीच बड़ी सफलता सामने आई है। बस्तर संभाग के जगदलपुर में मोस्ट वॉन्टेड हार्डकोर नक्सली कमांडर पापाराव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इसे बस्तर में शांति और विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस घटनाक्रम को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक प्रहार बताया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है और बस्तर में हिंसा की विचारधारा कमजोर पड़ती दिख रही है।
सरकार की नीति का असर
CM साय ने कहा कि सरकार की पुनर्वास और विश्वास पर आधारित नीतियों से भटके युवा मुख्यधारा में लौट रहे हैं। सुरक्षा, सम्मान और बेहतर जीवन के अवसर मिलने से नक्सली अब हथियार छोड़ने को तैयार हो रहे हैं।
बस्तर में बदल रही तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर में बंदूक की जगह विकास, विश्वास और नई उम्मीदों की आवाज सुनाई दे रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है, जिससे जनजीवन में बड़ा बदलाव आया है।
केंद्र और सुरक्षाबलों की भूमिका अहम
CM साय ने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन को दिया। साथ ही सुरक्षाबलों के साहस और रणनीति की सराहना की।
उन्होंने भरोसा जताया कि नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे के साथ बस्तर शांति और विकास की नई मिसाल बनेगा और छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।

