रायपुर/छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक बड़ी और निर्णायक खबर सामने आई है। दण्डकारण्य क्षेत्र में 25 माओवादी कैडरों (12 महिला सहित) ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापसी कर ली है। “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत हुआ यह आत्मसमर्पण नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे “विश्वास, लोकतंत्र और जनशक्ति की जीत” बताया है। उन्होंने कहा कि दण्डकारण्य आज एक ऐसे बदलाव का गवाह बन रहा है, जहां भय और हिंसा की विचारधारा अब खत्म होती नजर आ रही है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वाले इन 25 नक्सलियों पर कुल ₹1.47 करोड़ का इनाम घोषित था। इनका मुख्यधारा में लौटना इस बात का संकेत है कि अब भटके हुए लोग सरकार की पुनर्वास नीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा जता रहे हैं।
इस दौरान सुरक्षा बलों को भी बड़ी सफलता मिली है। 93 घातक हथियारों के साथ ₹14.06 करोड़ की बड़ी बरामदगी हुई है, जो नक्सली नेटवर्क के कमजोर पड़ने का स्पष्ट संकेत देती है।सीएम साय ने कहा कि यह सिर्फ आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि विश्वास की वापसी है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में बस्तर क्षेत्र शांति, स्थिरता और विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ेगा।
31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक अहम तारीख के रूप में देखा जा रहा है, जब नक्सलवाद के अंत की दिशा में एक ठोस और निर्णायक कदम सामने आया

