जगदलपुर/छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की समृद्ध आदिवासी परंपरा, संस्कृति, खान-पान और लोकनृत्य अब देश-दुनिया तक पहुंचेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को जगदलपुर के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय बस्तर पंडुम 2026 का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति को ढोकरा आर्ट से निर्मित कर्मा वृक्ष और कोसा शिल्प से तैयार गमछा भेंट कर बस्तर की सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराया।
राष्ट्रपति ने किया स्टॉल का निरीक्षण
कार्यक्रम के शुभारंभ से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर पंडुम में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आदिवासी समाज की परंपराओं, लोककला, हस्तशिल्प और जीवनशैली को नजदीक से देखा और सराहा।
कार्यक्रम में कई दिग्गज मौजूद
इस सांस्कृतिक महोत्सव में राज्यपाल रामेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
क्या है बस्तर पंडुम
बस्तर पंडुम जनजातीय संस्कृति का उत्सव है। ‘पंडुम’ शब्द का अर्थ उत्सव होता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2025 में की गई थी। इस वर्ष बस्तर पंडुम 7 फरवरी से तीन दिन तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें बस्तर के पारंपरिक खान-पान, लोककला, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी।
इस आयोजन का उद्देश्य बस्तर की संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। बस्तर पंडुम के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की संभावना है।
बस्तर आने वाली 5वीं राष्ट्रपति
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश की पांचवीं राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने जगदलपुर-बस्तर का दौरा किया है। इससे पहले डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, प्रतिभा पाटिल और रामनाथ कोविंद भी बस्तर आ चुके हैं।

